जानकर हैरान रह जायेंगे आप, माता के इस मंदिर में मूर्तियां करती हैं आपस में बातें

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चमत्‍कार से कम

दुनिया में आश्‍चर्य की कमीं नहीं, आज जिस आश्‍चर्य के बारे में आपको हम बताने जा रहे हैं वह आपने आप में किसी चमत्‍कार से कम नहीं है। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। यहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं। कुछ लोगों को यह पहले वहम लगता था लेकिन अब वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि मंदिर परिसर में किसी के भी नहीं होने का शब्द गुंजते रहते हैं।

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तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के इकलौते राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में साधकों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर की सबसे अनोखी मान्यता यह है कि निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से बोलने की आवाज आती हैं। मध्य रात्रि में जब लोग यहां से गुजरते हैं तो यहां पर आवाजें सुनाई पड़ती हैं। मंदिर के पुजारी इस बात की पुष्टि भी करते हैं। नगर के कई लोगों ने भी रात में मंदिर से बुदबुदाने की आवाज सुनने की बात कही है।

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ऐसा लगता है मानो मूर्तियां आपस में बातें करती हैं। इस बात को जांचने के वैज्ञानिकों के एक दल ने वहां रिसर्च किया जिसमें यह निकल कर आया कि वहां कोई भी नहीं होने पर शब्द गुंजते रहते हैं।

आपको बता रही हैं ऐसे मंदिर के बारे में जहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं कुछ लोगों को यह पहले वह हम लगता था लेकिन अब वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि मंदिर परिसर में किसी के भी नहीं होने का शब्द गूंजते रहते हैं तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के खिलाते राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में साधकों की हर मनोकामना पूरी होती है इस मंदिर की सबसे अनोखी मान्यता यह है कि निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से रोने की आवाज आती हैं मध्य रात्रि में जब लोग यहां से दूसरे से हैं तो आवाज सुनाई पड़ती हैं मंदिर के इस बात की पुष्टि भी करते हैं।

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नगर के कई लोगों ने भी रात में मंदिर से बिलबर दानी की आवाज सुनने की बात कही है ऐसा लगता है मानो मूर्तियां आपस में बातें करती हैं इस बात को जांचने के वैज्ञानिकों के एक दल ने वह सच किया जिसमें वह निकल कर आया कि वहां कोई भी नहीं होने पर शब्द करते रहते हैं वैज्ञानिकों ने माना है कि मंगल में कुछ ना कुछ गलत होता ही है वैज्ञानिक इस बात को देखकर हैरान है इस मंदिर की स्थापना लगभग 400 वर्ष पहले की गई थी इस मंदिर में कलश स्थापना का विधान नहीं है तंत्र साधना से ही यहां माता की प्राण प्रतिष्ठा की गई है।