सरोजनीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दोषी महिला डाक्‍टर को बचाने में लगा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग

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सरोजनीनगर। सरोजनीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गत दिनों एक नवजात की मौत के मामले में जांच के बाद दोषी के बजाय निर्दोष महिला चिकित्सक के खिलाफ स्वास्थ विभाग द्वारा की गई कार्रवाई चर्चा का विषय बन कर रह गई है। इस मामले को लेकर पीड़ित महिला डाक्‍टर ने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भेजकर दोबारा किसी दूसरे विभाग के सक्षम अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

बताते चलें कि सरोजनीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते 23 नवंबर को प्रसव के दौरान वहां तैनात महिला चिकित्सा अधिकारी की लापरवाही से एक नवजात की मौत हो गई थी। इस मामले में ईएमओ डॉ रश्मि रैना पर आरोप लगा था कि स्टाफ नर्स दीपमाला व आशा इंदुबाला के कई बार कहने पर भी डॉ रश्मि रैना लेबर रूम में बच्चे को देखने नहीं पहुंची। यही नहीं सीएचसी अधीक्षक डा0 विवेक प्रताप सिंह के कहने पर भी वह बच्चे को देखने नहीं गई, जिससे नवजात की मौत हो गई थी।

प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को भेजे गए पत्र में महिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नमृता बंसल का कहना है कि उस दिन वह अवकाश पर थी और घटना के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा गठित की गई टीम ने भी जांच में रश्मि रैना की गलती पाई, जिसको लेकर सीएमओ द्वारा अखबारों में भी बताया गया कि गलती की वजह से रश्मि रैना का स्थानांतरण जिलेे से बाहर करने के लिए शासन को संस्तुति भेजी गई है। पीड़ित डॉ नमृता बंसल का आरोप है कि इसके बावजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उसी की संविदा समाप्त करने का आदेश कर दिया गया, जो पूरी तरह गलत है।