इस भूतिया वीरान टापू पर जो गया वो वापस नहीं लौटा, जानिए क्‍या है वजह

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भूतों का अस्तित्व

इस दुनियां में बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं जिन पर इंसान को विश्वास नहीं होता है। इन्हीं चीजों को इंसान सदियों से समझने की कोशिश में लगे हुए हैं। जैसे कि क्या इस संसार में भूतों का अस्तित्व है? या यह सिर्फ एक भ्रम मात्र होते हैं। सदियों से इस विषय पर चर्चा होते आई है। पर आज तक इस बात पर एकमत नहीं मिल सका, विज्ञान मानता है कि ऐसे कुछ नहीं होता और इस बात को साबित करने के लिए विज्ञान के पास कोई प्रमाण भी नहीं है।

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अलौकिक ताकतों पर शोध करने वाले भूतों की दुनिया में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि यदि मनुष्य का संसार है तो भूतों का भी संसार होता है। इस बात का उनके पास प्रमाण भी है। जिसे विज्ञान भी नकार नहीं सकता है। विज्ञान के अनुसार इस दुनिया में हर चीज ऊर्जा है। और उसी से हर चीज बनी है। यानी ऊर्जा इंसानों में भी होती है।

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इसी ऊर्जा के कारण यह भौतिक ब्रह्मांड है। और इसी बात को अलौकिक ताकत पर विश्वास रखने वाले भी मानते हैं। उनके अनुसार ऊर्जा जब तक किसी इंसान के अंदर है। वह तब तक जीवित है। और यदि वह इंसान मर जाता है तो यही ऊर्जा उसके शरीर से निकल कर इस ब्रम्हांड में कहीं खो जाती है। जिसे हम भूत कहते हैं। यानी इस संसार में भूतों की भी दुनिया है। वह तो एक गहन शोध का विषय है कि क्या हम इसे पुख्ता तौर पर साबित कर सकते हैं या नहीं।

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आज हम आपको ऐसी ही एक घटना के बारे में बताएंगे जहां माना जाता है कि लाखों लोगों की आत्मा बसती हैं यह जगह हैं प्रोबेग्लिया आईलैंड। इटली में जिसे मौत की आईलैंड के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां जाने वाले लोगों का जिंदा बचकर लौट पाना मुश्किल है। और अगर वह किसी तरह लौट भी जाता है तो उसकी जिंदगी नर्क समान हो जाती है। इस आयरलैंड से जुड़ी हुई एक खौफनाक कहानी भी है। जिसकी वजह से लोग यहां का नाम सुनने से ही घबरा जाते हैं।

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लोगों को इस आईलैंड पर सैकड़ों साल पहले मरने के लिए छोड़ दिया जाता था। प्‍लेग और बुखार से पीडि़त लोगों को यहां लाया जाता था। ऐसे में जो लोग यहां आते थे उन्‍हें मरने के बाद यहीं दफना दिया जाता था। मरीजों की बढती हुई संख्या को देखते हुए लगभग 160000 मरीजों को जिंदा जला दिया गया।

इस घटना के बाद से ही यहां जो लोग गए उन्हें यहां पर अजीब से अनुभव हुए। इसके बाद स्‍थानीय सरकार ने यहां पर एक मानसिक हॉस्पिटल बनवाया परंतु कुछ सालों के अंदर ही वह काम करने वाले डाक्टर के द्वारा बताया गया कि उन्‍हें कुछ रहस्‍यमय साये नजर आते हैं।

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मेंटल हॉस्पिटल के बंद होने के कई साल बाद तक यह आईलैंड दोबारा वीरान पड़ा रहा। इसके बाद इटली की सरकार ने सन 1964 में इसे प्राइवेट मालिक को बेच दिया। वह शख्स भी अपने परिवार के साथ यहां रहने को आया। पर कुछ ही दिन रह सका और फिर इस जगह को छोड़कर चला गया।

इसके बाद यह आईलैंड फिर बिका और एक दूसरे परिवार ने इससे हॉलिडे होम बनाने के लिए खरीदा। लेकिन वह भी वहां सिर्फ 1 दिन ही टिक सके, कहा जाता है कि इस आइलैंड के मालिक की बेटी के मुंह को किसी ने काट दिया था जिसे जोड़ने के लिए 14 टांके लगाने पड़े। इन तमाम घटनाओं के बाद भी कई लोगों ने इसकी पड़ताल करने की कोशिश करी लेकिन सच की तलाश में गए ज्यादातर लोग यहां से जिंदा लौटकर नहीं आ सके।

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यह आईलैंड इस बार हमेशा के लिए विरान हो गया हालांकि जो लोग बच कर वापस लौट आए थे उनका सिर्फ यही कहना था कि यहां पर बीमारी से मरे हुए लोगों की आत्माएं भटक रही हैं। क्योंकि इस जगह की पड़ताल करने आई ज्यादातर टीमें सरकारी थी। तो सरकार ने यहां लोगों के जाने पर पाबंदी लगा दी जो आज तक लागू है मछुआरे भी इसके पास मछली पकड़ने नहीं जाते क्योंकि उनके जाल में कई बार इंसानों की हड्डिया ही फंसती हैं।

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