खुलासा : बाबर ने अपने मर्द आशिक की याद में बनवाई थी बाबरी मस्जिद

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मुस्लिम शासक बाबर

मुस्लिम शासक बाबर 1527ई में फरगना से आया था। उसने चित्तौड़गढ़ के हिंदू राजा राणा संग्राम सिंह को फतेहपुर सीकरी में पराजित कर दिया था। बाबर ने अपनी युद्ध में तोपों और गोलों का इस्तेमाल किया। जीत के बाद बाबर ने इस क्षेत्र का प्रभार मीरबांकी को दे दिया। मीरबांकी ने उस क्षेत्र में मुस्लिम शासन लागू कर दिया। उसने आम नागरिको को नियंत्रित करने के लिए आतंक का सहारा लिया।

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दरअसल प्राचीन समय में अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थान पर एक मंदिर हुआ करता था। सन् 1528ई में बाबर ने भारत पर आक्रमण करने के बाद भारत के जिस स्थान पर मंदिर हुआ करते थे वहां पर बाबर ने मस्जिद बनवा दी। अयोध्‍या में भी उसने यही किया जहां पर राम जन्‍म भूमि का मंदिर था वहां पर उसने मस्जिद बनवा दी।

दिन में हिंदूओं के कटे सर की मिनार बनाने वाला बाबर जब रात में अपने मर्द आशिक बाबरी के पास अपने रूमानी पल बिताने जाता था तब पता नहीं कितने आसमान से फरिश्‍ते आंसू बहाते होगें।

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दरअसल बाबरी एक चौदह साल का लड़का था। जिसकी मर्दानगी ने बाबर के कली समान दिल को खिलाकर फूल बना दिया था। ये कोमल कली जब अफीम के कुछ दम लगा लेती थी तब ये अंगारा बन जाती थी।

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आसपास के बच्चों के लिए उसकी यह हालत दर्दनाक रात लेकर आती थी। बच्चों को देखकर इस हैवान कीहवस बेकाबू हो जाती और फिर किसी मासूम की जिंदगी खराब कर के ही ठंडी होती थी। बाबरनामा में बाबर लिखता है कि उसकी अपनी पत्नी में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसके दिलों दिमाग पर तो बस चिकना लड़का बाबरी ही छाया हुआ था। बाबर लिखता है कि उसने टूटकर किसी से ऐसी मोहब्‍बत नहीं की जैसी की उसने बाबरी के साथ की थी।

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बाबर की शादी 17 साल की उम्र में ही मार्च 1500 आयशा नमक स्त्री से हो गई थी। लेकिन समलैंगिक गे होने के कारण बाबर को अपनी पत्नी में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। यह बात खुद उसने अपने बाबरनामा भी लिखी है। कि मैं अयशा के पास 10 या 15 दिन में एक बार जाया करता था और आयशा के प्रति मेरा प्‍यार बहुत कम था। मेरी मां मुझे इसके लिए डा़टा करती थी।

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बाजार में बाबरी नामक एक लडका था हमारी नामों में समरूपता थी मुझे अपनी पत्‍नी से नहीं बल्कि उस लड़के से मोहब्बत थी और मैं उस लड़के को चाहने लगा था। यहां तक कि उसके लिए पागल हो गया था। बाबरी नामक नाबालिक के प्यार में पागल बाबर से यह आशा करना बेवकूफी है कि उसमें अयोध्या में मंदिर तोड़कर अपने नाम पर बाबरी मस्जिद बनवाई होगी।

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इसकी जगह निश्चित ही उसने अपने प्रेमी के नाम पर ही मस्जिद का निर्माण करवाया होगा। और साथ ही करना होगा लेकिन हमेशा की तरह बाबरी नाम देखते ही इतिहासकारों ने बिना सोचे समझे उसे बाबर के नाम के साथ जोड़ दिया। जबकि वह मस्जिद बाबर के नाम पर नहीं बल्कि समलैंगिक साथी बाबरी के नाम पर बनवाया गया था। जिसका बाबर दीवाना था। कमाल की बात यह है कि मुस्लिम बिना जाने समझे ही बाबरी मस्जिद के लिए परेशान हैं।