सरोजनी नगर में फिर हुआ सपाई अधिकारियों का बोलबाला

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राहुल तिवारी

लखनऊ। डीपीआरओ के दबाव मे दिया सरोजनी नगर के नये एडीओ पंचायत कौशल कन्नोजिया को चार्ज, सपा सरकार के करीबी माने जाते है नये एडीओ सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिये भले ही सकल्पवद्ध है लेकिन जिले मे बैठे अधिकारी चाहे वह जिले के डीएम हो सीडीओ हो या फिर पंचायत विभाग मे बैठे जिला पंचायत राज अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने मे कोई कसर नही छोड रहे है। ऐसे अधिकारियो पर दिव्य द्रष्टि कब पडेगी।

ताजा मामला है सरोजनी नगर विकास खंड का जहां पर भ्रष्टाचार का बोलबाला दिन पर दिन बडता जा रहा है। विकासखंड का नाम काफी सुरखियों मे चल रहा है और शासन प्रशासन मौन है। बताते चले खंड विकास अधिकारी सरोजनी नगर अजय प्रताप सिंह भी काफी सुरर्खियों मे लगातार चल रहे हैं जिसकी लगातार खबरे बीते मंगलवार को अखबार से लेकर टीवी चैनल तक प्रकाशित हो रही हैं। कई बार भाजपा कार्यकर्ता व जनता द्वारा बीडीओ के भ्रष्टाचार की शिकायत देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लगाकर उच्चाधिकारियों तक से की गयी लेकिन मूकदर्शक बना जिले का प्रशासन रसूखदार बीडीओ पर कार्यवाही करने के बजाय महज तीन माह पहले सरोजनी ब्लाक मे एडीओ पंचायत के पद पर तैनात हुये महेन्द्र तिवारी को जिले के आला अफसरो डीपीआरओ ने स्थानातरण कर 14 वर्ष सरोजनी नगर ब्लाक मे ग्राम विकास अधिकारी के पद पर तैनात रहे कौशल कन्नौजिया वर्तमान मे मोहनलाल गंज मे ग्राम विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे जिनको सरोजनी नगर ब्लाक मे एडीओ पंचायत के पद पर तैनात कर दिया गया।

ये पूर्व मे रहे एडीओ पंचायत महेन्द्र तिवारी से जबरन दबाव से डीपीआरओ के कहने पर आज चार्ज दे दिया गया। अधिकारियो के इस रवैये सरोजनी नगर के भाजपाइयों मे काफी रोष है जबकि पूर्व मे रहे एडीओ पंचायत की कार्यशैली लोगो के बीच काफी सराहनीय रही लेकिन शायद कुछ छुट पुट नेताओ व अधिकारियो के सामने ये इमानदारी व अच्छा काम करने वालो को सपा सरकार से समबन्ध रखने वाले जिले के अधिकारी अनावश्यक छेडछाड कर विकास मे तो बाधा डालने का काम कर ही रहे है। साथ ही सरकार की भी फजीयत कराने मे भी इन अधिकारियो का विशेष योगदान रहता है।

बताते चले नवनियुक्त एडीओ पंचायत का इसी ब्लाक मे एक ईट भट्टा के साथ कई जगह की बनायी अकूत सम्पति का मालिक भी है। ऐसा भी क्या था कि आनन फानन मे कार्य कर रहे एडीओ पंचायत को हटाकर नये ग्राम विकास अधिकारी को नया एडीओ पंचायत बनाया गया। वैसे भी एक ग्राम विकास अधिकारी के पास ये अकूत सम्पति कहां से आयी क्या इसकी जांच कोई करेगा।

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