किसानों की फसलों पर कहर बरपा रहे हैं आवारा जानवर, अन्नदाता की नींद हराम

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आवारा जानवरों

लखनऊ । सरोजनी नगर क्षेत्र के ग्रामीण किसान आवारा जानवरों द्वारा खेतों में खड़ी फसलों को दर्जनों की तादाद में घुसकर चर चर कर नष्ट किए जाने की वजह से पूरी तरीके से परेशान है जिससे तंग ग्रामीण किसान खेतों में झोपड़ी डालकर फसलों की दिन-रात रखवाली कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद पलक झपकते ही अन्ना घूम रहे जानवरों का आतंक ग्रामीण किसानों की फसलों पर बुरी तरीके से व्याप्त हो जाता है जिसकी वजह से क्षेत्र के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है।ग्रामीण किसानों द्वारा आवारा घूम रहे सैकड़ों की तादाद में जानवरों को दिन रात तमाम लोग इकट्ठा होकर  दूर-दूर तक खेद आते हैं लेकिन इसके बावजूद यह पलट कर फिर आ जाते हैं आवारा जानवरों का आलम यह हो गया है कि किसानों को एक पल भी इन से राहत नहीं मिल पा रही रात में ग्रामीण किसान टॉर्च लेकर के आवारा

जानवरों को कई किलोमीटर दूर तक खदेड़ आते हैं लेकिन इसके बावजूद एक-दो दिन बाद इन की आमद फिर हो जाती है।दर्जनों की तादाद में इन का कहर फसलों पर एक साथ टूट पड़ता है जिसके चलते खेतों में खड़ी फसलें नेस्तनाबूत हो जाती हैं। पूरे सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र के ग्रामीण किसान अन्ना जानवरों को लेकर त्राहि त्राहि करते चले आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी शासन प्रशासन द्वारा किसानों की परेशानी की ओर ध्यान न दिए जाने के कारण किसानों में आक्रोश बना हुआ है।

बताया जाता है कि इससे पूर्व ग्रामीण किसान नीलगाय के आतंक से अजीज हो उठे थे लेकिन करीब दो साल से आवारा जानवरों की लगातार तादाद बढ़ जाने की वजह से किसानों के घाव और भी ज्यादा गहरे हो गए क्योंकि आवारा जानवरों की तादाद निरंतर विकराल रूप धारण करती जा रही है। एक और जहां नगर निगम द्वारा शहर से लाकर ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा जानवरों को छोड़ा जा रहा है वही गांव के पालतू जानवर भी लोग छोड़ देते हैं जिससे इनकी संख्या चौगुनी हो जाती है।ग्रामीण किसान बताते हैं कि आवारा जानवरों की आमद इस तरह हो गई है कि किसी भी फसल को पैदा कर पाना बड़ा ही मुश्किल हो गया है क्योंकि नीलगाय के अलावा अब आवारा जानवर सबसे बड़ी मुसीबत बन चुके हैं।फसलों को बचाने के लिए ग्रामीण किसानों ने खेतों में कटीले तार लगा रखे हैं लेकिन इसके बावजूद जानवर खेतों में फांद जाते हैं।अन्ना जानवरों से लगातार परेशान होते ग्रामीण किसान अब खेतों में झोपड़ी बनाकर फसलों की रखवाली कर रहे हैं लेकिन खेतों में डेरा डालने के बावजूद पूरी तरीके से फसलों को सुरक्षित रख पाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं।

दिन रात खेतों में झोपड़ी बनाकर रह रहे ग्रामीण किसान भयंकर ठंड की मार झेल रहे हैं इसके बावजूद अन्ना जानवरों से निजात नहीं मिल पा रही हैं। पूरे सरोजनीनगर क्षेत्र में आवारा जानवरों का कहर फसलों पर इस तरह टूट रहा है कि 25% से अधिक फसल आवारा जानवरों से बचाने के बावजूद पूरी तरीके से अभी से ही नष्ट हो चुकी जबकि अभी लगभग गेहूं जैसी आदि फसलों के कटनी में लगभग 3 माह का वक्त शेष बकाया है।

ज्ञात हो कि आवारा जानवरों का आतंक सड़क से लेकर खेतों तक बढ़ता जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी शासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है जिससे आम जनता में शासन के खिलाफ भयंकर तरीके से रोष प्रतिदिन उत्पन्न होता जा रहा है।लोगों का कहना है कि शासन को चाहिए कि न्याय पंचायत या फिर ब्लॉक स्तर पर अन्ना जानवरों के लिए पहले की तरह है कांजी हाउस बनाए जाएं जिससे इन अन्ना जानवरों पर काबू पाया जा सके और फसलें भी सुरक्षित रह सकें क्योंकि अन्ना जानवरों की वजह से खेतों की फसल नष्ट हो ही रही है वहीं सड़क पर बेतरतीब खड़े रहने और बैठने की वजह से मार्ग दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं जिससे जानवरों के साथ साथ लोग भी आगोश की नींद सो जाते हैं।

तहसील सरोजनी नगर क्षेत्र के ग्रामीण किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इन अन्ना जानवरों पर प्रतिबंध लगाने के लिए पहले की तरह काजी हाउसों की स्थापना कराई जाए जिससे आम जनमानस को आवारा जानवरों से राहत मिल सके और किसानों की बर्बाद ना हो एवं  पहले की भाति फसलें एक बार फिर लहलहा उठे।